Raimz
दिल

"दिल" के साथ तुक

"आज की तुक" में शामिल शब्दों में से, इस हफ़्ते हम "दिल" पर थोड़ा गहराई से नज़र डालते हैं।

"दिल" की बनावट

"दिल" एक ही अक्षर (अक्षर = शब्दांश) का शब्द है — /d̪ɪl/। स्वर सिर्फ़ ɪ है और अंत में व्यंजन l आता है।

Raimz हिंदी में तुक दो तरह से नापता है। पूर्ण तुक में अंत का व्यंजन भी मिलना ज़रूरी है, जबकि स्वर तुक में सिर्फ़ स्वर देखा जाता है। "दिल" जैसे एक-अक्षर वाले शब्द में पूर्ण तुक का दायरा इसीलिए बहुत छोटा हो जाता है — पूरा शब्द ही तुक का हिस्सा है, बचने को कुछ नहीं रहता।

"दिल" के साथ तुक करने वाले शब्द

पूर्ण तुक सिर्फ़ 4 हैं: बिल, तिल, मिल, सिल

चारों एक-अक्षर के शब्द हैं, और यही "दिल" की असली दिक़्क़त है — पूरा शब्द ही एक अक्षर का होने से, उससे तुक करने वाला शब्द भी एक ही अक्षर का होना पड़ता है।

असली भंडार अगली परत में है। अंतिम अक्षर की तुक — यानी शब्द के आख़िरी अक्षर का स्वर और व्यंजन मिलना — में 42 शब्द मिलते हैं, और यहीं ग़ज़ल-नज़्म वाली जानी-पहचानी क़तार खड़ी हो जाती है:

मंज़िल, मुश्किल, महफ़िल, क़ातिल, साहिल, शामिल, हासिल, क़ाबिल, जटिल, मोबाइल, मिसाइल, तमिल, अनिल, अखिल

इनमें ख़ुद "दिल" से बने समास भी हैं: बुज़दिल, ख़ुशदिल, नेकदिल, सख़्तदिल, पत्थरदिल, बेदिल। ये शब्द तुक भी मिलाते हैं और अर्थ भी उसी दायरे में रखते हैं।

स्वर तुक में अंत का व्यंजन छोड़कर सिर्फ़ स्वर ɪ देखा जाता है, तो सूची 98 शब्द तक फैल जाती है: दिन, सिर, फिर, इश्क़, चित्त, ज़िद, सिंह, विष, हित, स्थिर, निज, वृद्ध

इश्क़ का इसी परत में आना ध्यान देने लायक़ है — अर्थ के लिहाज़ से "दिल" का सबसे नज़दीकी साथी, तुक के लिहाज़ से सबसे बाहरी परत में।

-िल का पूरा भंडार: 47 शब्द

Raimz में -िल पर ख़त्म होने वाले शब्द कुल 47 हैं। यही इस पूरे हफ़्ते का मैदान है।

ये 47 शब्द पूर्ण तुक के हिसाब से 14 समूहों में बँटते हैं। सबसे बड़ा समूह 11 शब्दों का है — शामिल, हासिल, क़ातिल, क़ाबिल, साहिल, कामिल — और दूसरा 10 शब्दों का: मंज़िल, महफ़िल, जटिल, अखिल, अनिल, तमिल, कपिल।

"दिल" का अपना समूह सबसे छोटे समूहों में से है — सिर्फ़ 5 शब्द: दिल, बिल, तिल, मिल, सिल।

"दिल" वाले शब्द "दिल" से तुक नहीं मिलाते

ऊपर गिनाए गए समास — बुज़दिल, ख़ुशदिल, नेकदिल, सख़्तदिल, पत्थरदिल, बेदिल — सब इसी 47 शब्दों के भंडार में हैं। लेकिन इनमें से एक भी "दिल" की पूर्ण तुक में नहीं आता

छहों चार अलग-अलग समूहों में बिखर जाते हैं:

वजह साफ़ है: पूर्ण तुक में आख़िरी अक्षर से पहले वाला स्वर भी गिना जाता है। "दिल" के आगे जो कुछ जुड़ता है, वह उस स्वर को बदल देता है — और शब्द दूसरे समूह में चला जाता है।

अर्थ पास रहता है, तुक दूर हो जाती है।

एक बात जो नहीं मिलेगी

"दिल" के पन्ने पर मिलती-जुलती ध्वनि का ख़ाना ख़ाली रहता है। यह ख़राबी नहीं है: एक-अक्षर के शब्द में "एक ध्वनि का फ़र्क़" का मतलब होता है पूरा अक्षर ही बदल जाना, यानी नतीजे में बिलकुल असंबंधित शब्द भर जाते। इसलिए एक-अक्षर वाले शब्दों में Raimz यह सूची जान-बूझकर नहीं दिखाता।

दूसरी भाषाओं में "दिल"

Raimz हिंदी के अलावा जापानी, कोरियाई, इंडोनेशियाई, बंगाली और तगालोग भी संभालता है। "दिल" के बराबर के शब्द की पूर्ण तुक की गिनती हर भाषा में अलग है:

फ़र्क़ की वजह शब्दकोश का आकार भर नहीं है। hati खुले स्वर पर ख़त्म होता है, इसलिए उसे सिर्फ़ a–i मिलाना है; "दिल" को अंत का l भी मिलाना पड़ता है। शर्त जितनी सख़्त, साथी उतने कम।

निष्कर्ष

"दिल" की पूर्ण तुक कम है, पर अंतिम अक्षर की तुक में वही शब्द मिलते हैं जिन पर उर्दू-हिंदी की पूरी ग़ज़ल परंपरा टिकी है। Raimz पर ख़ुद खोजकर देखें।


यह लेख "आज की तुक" सीरीज़ की इस हफ़्ते की थीम "दिल" पर है।

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